Monday, 9 March 2015

८ मार्च - महिला दिवस

आज महिला दिवस है ये चर्चा सरेआम है। बहुत प्रसन्नता की और गौरव की बात है आज अनेक सभाएं अनेक गोष्ठियां आयोजित होंगी पुरस्कार वितरण होगा आदि आदि। जेहन में प्रश्न ये आता है कि क्या नारी किसी एक दिन ही सम्मानित और पूज्यनीय होगी वो भी कलम और भाषण के द्वारा?


इतिहास गवाह है नारी के बलिदान और त्याग का। कंधे से कन्धा मिला हमारी वीरांगनाओं ने अपना योगदान दिया।हमारी माताओं, बहनों और बेटियों ने अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया समय समय पर।



परंतु उन नारियों को हमने क्या दिया। अपमान, तिरस्कार और न जाने क्या क्या। नारी का शोषण करना अपना नैतिक कर्तव्य समझा। जिन नारियों ने अपना सर्वस्व त्याग कर वीरों और महानायकों को जन्म और संस्कार देकर हमे गौरवान्वित किया और करती चली आ रहीं उनकी दशा आज क्या है समाज और घरों में?



माँ, बेटी, बहन तथा पत्नी को क्या मान सम्मान मिला। हम समानता की बात तो करते हैं पर समानता का अर्थ नही जानते या हमे समझाया नही गया। नारी का सम्मान घर से शुरू होता है फिर देश में नारी का सम्मान और अस्तित्व सुरक्षित होगा तब जाकर पूरी दुनियां में सम्मान मिलेगा। हमे अपनी संतानों में ये भेदभाव मिटाना होगा कि ये बेटा है और ये बेटी। बेटा बेटी दोनों को एक दूसरे के प्रति आदर सम्मान और प्रेम सिखाना होगा।



नारी त्यागमयी है, संवेदनशील है, ममतामयी है सबपे ममत्व और प्रेम लुटाती है,  संस्कार देती है, सम्मान देती है तो क्या वो थोडा प्यार आदर सम्मान पाने की अधिकारी नही। जब परमात्मा ने अर्धनरीश्वर का रूप धर हमें सन्देश दिया तो हम उसे नज़र अंदाज़ क्यों करते हैं। नारियों को भी समानता का अर्थ समझना होगा। समानता का गलत प्रयोग न कर स्वयं को विचारशील व आदर्श बनाना होगा। आज़ादी का मतलब उश्रृंखलता कदापि नही। ये हर स्त्री और बेटी को समझना होगा कि समानता का अर्थ पुरूषों का दमन और असम्मानित करना नही,वरन उनके कदम से कदम मिलाकर घर समाज और देश का उद्धार और संस्कारयुक्त करना है।


नारी और पुरुष दो आधार स्तम्भ हैं और इसी पे हमारी नीव टिकी है। अतः हम एक दूसरे के पूरक बन एक खुशहाल घर समाज और देश बनाएं तभी नारी सशक्तिकरण वास्तविक सफल होगा।

माँ बहन बेटी पत्नी सहकर्मी और दोस्त आदि नारी के हर रूप का का आदर सम्मान करो और हर मोड़ पे उनका साथ देकर मिसाल कायम करो तभी हमारी जीत ख़ुशी और गौरव है। तब हम किसी एक दिन ये दिवस न मनाकर हर पल हर लम्हा इसे महसूस करेंगे और नारी पुरुष का भेदभाव मिटाकर एक दूजे को मान सम्मान देंगे और एक सुरक्षित समृद्ध खुशहाल घर समाज और देश बनाएंगे।

यही उचित मन्त्र है पुरस्कार है नारी के प्रति सम्मान,आदर और प्रेम का।

............................।।मौली।।